जमुई, जनवरी 30 -- जमुई। निज संवाददाता भारत में बायोमेडिकल कचरे (मेडिकल वेस्ट) का कुप्रबंधन एक गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। अस्पताल, क्लिनिक, प्रयोगशाला और टीकाकरण केंद्रों से उत्पन्न होने वाला संक्रमणकारी कचरा, जैसे उपयोग की गई सुइयां, पट्टियां, रसायन अगर सही ढंग से नष्ट नहीं किए जाते, तो वे एचआईवी, हेपेटाइटिस और अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का कारण बन सकता है। लेकिन सदर अस्पताल में होने वाले मेडिकल वेस्ट को भागलपुर की एक निजी कंपनी के द्वारा सप्ताह में दो बार आकर बायोलॉजिकल कचरा आकर ले जाती है जबकि अन्य कचरा नगर परिषद का वाहन आकर ले जाती है। सदर अस्पताल परिसर में भी जैविक कचरा प्रबंधन बना हुआ है जिसमे मेडिकल वेस्ट रखा जाता है और भागलपुर से आई वाहन मेडिकल वेस्ट को लेकर जाती है। बताते चले कि केंद्रीय प्र...