मधुबनी, फरवरी 20 -- मधुबनी । मिथिला की 15 दिवसीय पारंपरिक मध्यमा परिक्रमा यात्रा के दौरान विभिन्न देव स्थलों पर मेले में पहुंचने वाले साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए न तो पानी की व्यवस्था रहती है और नहीं शौचालय की। मेला में आने वाले साधु-संत और श्रद्धालु बुनियादी सुविधाओं के लिए काफी दिक्कतों का सामना करते हैं और महिलाओं की काफी फजीहत होती है। समस्या इस कदर बढ़ जाती है कि पवित्र धार्मिक स्थलों पर पहुंचने वाले लोगों को खुले में शौच करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। आजादी के सात दशक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद पौराणिक और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों पर मेले में पहुंचने वाले साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए शौचालय और पेयजल की व्यवस्था नहीं है। मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। सरकारी योजनाओं और विकास के दावों के बीच इन पौराणिक स्थलों क...