मुंगेर, जनवरी 25 -- मुंगेर, हिन्दुस्तान प्रतिनिधि। नगर भवन में चल रहे पंच कल्याणक महोत्सव के पांचवें दिन बिहार योग भारती के स्वामी निरंजनानंद सरस्वती ने कहा कि तृष्णा, राग और द्वेष दुखी जीवन का कारण है। चिंता असंतोष, लोभ, मोह, काम, क्रोध, हिंसा आदि बुराइयों से अलग रह कर ही मनुष्य अपने मूल लक्ष्य की ओर जा सकता है। माया मुक्त होकर परमात्मा को प्राप्त करना ही मानव का मूल लक्ष्य है। सुबह शांति पाठ एवं हवन के बाद जैन आचार्य प्रमुख सागर जी महाराज ने कहा कि पंच कल्याणक साधना से एक मंदिर बनवाने का फल भक्तजनों को प्राप्त होता है। उन्होंने मुंगेर में विश्व के प्रथम योग विश्वविद्यालय बिहार योग भारती की स्थापना को इस शहर का गौरव बताया। कहा कि योग गुरु स्वामी निरंजनानंद से प्राप्त योग की पुस्तकों का अध्ययन कर के योगासन की विशेषताओं को सामने रखूंगा। सा...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.