खगडि़या, सितम्बर 15 -- परबत्ता । एक प्रतिनिधि अंग्रेजी हुकूमत निरंकुश शासक में क्षेत्र के लोगो क़ो आर्थिक मजबूती प्रदान करने वाला खादी ग्रामोद्योग आज उनके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। पर, सरकार व विभाग इसके प्रति उदासीन बने हुए हैं। इसे पुनर्जीवित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। बुजुर्गो की माने तो इस क्षेत्र के लोग आजादी के पूर्व से ही बापू के चरखे के दीवाने थे लेकिन आज बापू के चरखे की संगीत सुनाई नहीं पर रही है क प्राप्त जानकारी के अनुसार अंग्रेजी हुकूमत निरंकुश शासनकल में आजादी के पूर्व वर्ष 1927 में ही प्रखंड के कन्हैयाचक, डुमरिया बुजुर्ग खजरैठा, माधवपुर, कबेला आदि में खादी भंडार की स्थापना की जा चुकी थी। स्थापना के बाद प्रखंड के दर्जनों गांवों की महिला व पुरुष गांधी के चरखे की संगीत की धुन के दीवाने हो गए थे। गांव...
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