रांची, जनवरी 30 -- रांची, संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के एक पुराने मामले में अहम फैसला सुनाते हुए हजारीबाग की निचली अदालत द्वारा दी गई आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया। अदालत ने दोनों सजायाफ्ताओं को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। यह फैसला जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने सुनाया। कोर्ट ने कहा कि मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है और अभियोजन की पूरी कहानी परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है, जो आपस में जुड़कर आरोप सिद्ध करने में विफल रही। ये अपीलें हजारीबाग के आठवें अपर सत्र न्यायाधीश द्वारा वर्ष 2003 में दिए गए फैसले के खिलाफ शत्रुघन प्रसाद डांगी और धानु भुइयां की ओर से दायर की गई थी, जिन्हें हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया। क्या है मामला : मामला वर्ष 2000 का है, जब शत्रुघन प्रसाद ड...