नई दिल्ली, फरवरी 4 -- अक्सर यह माना जाता है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां ज्यादातर उन लोगों को घेरती हैं जिनका वजन ज्यादा है या जिनकी जीवनशैली खराब है, लेकिन जब बात गर्भाशय के कैंसर (Uterine Cancer) की आती है, तो यह धारणा एक जानलेवा गलती साबित हो सकती है। हकीकत यह है कि कैंसर किसी का वेट स्केल या बॉडी मास इंडेक्स (BMI) देखकर हमला नहीं करता। दुबला-पतला होना सेहतमंद होने की गारंटी जरूर लग सकता है, लेकिन शरीर के भीतर छिपकर पनप रहे हार्मोनल असंतुलन, जेनेटिक म्यूटेशन और साइलेंट लक्षणों का कद-काठी से कोई लेना-देना नहीं होता। सीके बिरला हॉस्पिटल की स्त्रीरोग रोग विशेषज्ञ डॉ. परमिंदर कौर कहती हैं कि फिटनेस का मतलब केवल बाहर से 'स्लिम' दिखना नहीं, बल्कि अंदरूनी अंगों की सेहत और नियमित जांच भी है। लोगों को अक्सर लगता है कि गर्भाशय (यूटेरस) का कैंसर...