जहानाबाद, फरवरी 21 -- मखदुमपुर, निज संवाददाता। ठंड के समापन के साथ पतझड़ का मौसम शुरू हो गया है। पतझड़ के मौसम आने के साथ पेड़ों से पुरानी पत्तियां गिरने लगी हैं और नई-नई लाल-लाल कोपले निकलने लगी है। इस परिवर्तन के कारण ही पतझड़ के मौसम को नई ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। तो वही दार्शनिको की दृष्टि में पतझड़ का मौसम यह दर्शाता है कि प्रकृति में कोई भी चीज स्थाई नहीं है। पुराने की जगह नए का स्थान आता है। पतझड़ का दृश्य चारों तरफ दिखाई दे रहा है। बाग बगीचे और सड़क के किनारे के पेड़ पौधे अपनी पुरानी पत्तियां छोड़ रही हैं। पत्ती विहीन पौधे ऐसे लग रहे हैं जैसे उन पर विपत्ति आ गया है। उन विपत्ति के बाद कहीं-कहीं पौधे में नई-नई पत्तियां भी निकल रही हैं। पतझड़ के साथ मौसम भी सुहाना हो चला है। शरद ऋतु की विदाई हो रही है तो धीरे-धीरे गर्मी का आगमन हो रहा है। ...
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