वाराणसी, फरवरी 14 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। तुलसीघाट पर ध्रुपद मेला की तीसरी संध्या के आगाज में ही आदिसंगीत के विश्वव्यापी विस्तार की झलक दिखी। शुक्रवार की शाम जापानी कलाकार मोमोको मियूरा ने अत्यंत सधे अंदाज में पक्की गायिकी कर देसी श्रोताओं को अपना मुरीद बना लिया। गुंदेचा बंधुओं की शिष्या मोमोको मियूरा ने सुर प्रवाह के लिए अप्रचलित राग सरस्वती का चयन किया। आलाप के बाद पहले चौताल और बाद में सूल ताल में गायन के लिए जो बंदिशें चुनीं वह भी मां सरस्वती की आराधना में रहीं। पखावज पर संगत उनके हमवतन दैम नाकागावा ने संगत की। तानपूरा पर फ्रांस की मेरेल रहीं। द्वितीय प्रस्तुति में पंजाब के प्रो. हरभजन सिंह धारीलाल ने स्वतंत्र पखावज वादन किया। 'लौहारबाज' शैली में वादन के लिए ख्यात प्रो. धारीवाल ने चौताल में निबद्ध बोलों को अलग-अलग लयकारियों के सा...