वाराणसी, जनवरी 31 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। पद्मविभूषण पं.छन्नूलाल मिश्र ने अपने जीवन में जो संघर्ष किया था उसी का प्रतिफल उन्हें लोकप्रियता के रूप में प्राप्त हुआ। वह स्वभाव से जितने सहज थे उनका संगीत भी उतना ही सहज बनकर उभरा। ये बातें पद्मभूषण पं.साजन मिश्र ने कहीं। वह बनारस लिट् फेस्ट की पहली शाम शुक्रवार को परिचर्चा सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि पं.छन्नूलाल मिश्र ने अपने जीवन में ऐसे दिन भी काटे थे जब उन्हें सुबह के नाश्ते से रात के भोजन तक में सिर्फ पानी पीकर ही पेट भरना पड़ा। कलाकार को संघर्ष ही चमकाता है। उनका संघर्ष हमने देखा है। महसूस किया है। खुद को उन्होंने शास्त्रीय और उपशास्त्रीय संगीत के दिग्गज गायकों के बीच स्थापित किया। वह रिश्ते में मेरे जीजा लगते थे। यही कारण था कि कहीं भी मिल जाते तो कहते 'का सरऊ का हाल हौ।' व...
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