बगहा, दिसम्बर 5 -- बेतिया, विधि संवाददाता। न्यायाधीश और अधिवक्ता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। दोनों एक दूसरे के पूरक हैं। हमारा समुह तीन शब्दों राइटिंग, रीडिंग और कॉन्फिडेंसी से बनता है। यही विशेषता हमें खाश बनाती हैं। उक्त बातें बुधवार की संध्या जिला विधिज्ञ संघ भवन में आयोजित वार्षिकोत्सव समारोह में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उच्च न्यायालय पटना के माननीय न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडे ने कही। उन्होंने कहा कि सबसे जरुरी है लगातार अध्यन और अभ्यास करना। लगातार अध्यन और अभ्यास करने से ज्ञान बढ़ता है। हमारे लिए यह गौरव की बात है कि हम भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के जन्मदिन के अवसर पर हम उन्हें याद कर रहे हैं। उनके मार्गो पर चलने का संकल्प लें रहे हैं । राजेंद्र बाबू के जन्म दिन पर मंच साझा करना बहुत ही सुखद पल है। न्या...