फरीदाबाद, फरवरी 7 -- फरीदाबाद। अंतरराष्ट्रीय सूरजकुंड शिल्प मेले में काठमांडू से आए शिल्पकार तेज नारायण अपने साथ दुर्लभ और शुद्ध नेपाली पशमीना शॉल और मफलर लेकर पहुंचे हैं। उनकी यह पशमीना शॉल अपनी बेहतरीन गुणवत्ता, मुलायम बनावट और शाही लुक के कारण देश-विदेश के पर्यटकों को खूब लुभा रही है। तेज नारायण बताते हैं कि असली नेपाली पशमीना शॉल भूटान की अल्ताई बकरी के बच्चे से प्राप्त की गई बेहद महीन ऊन से तैयार की जाती है। यह ऊन अत्यंत दुर्लभ होती है और प्राकृतिक रूप से सीमित मात्रा में ही उपलब्ध रहती है। एक बकरी के बच्चे से मात्र दो ग्राम ही ऊन निकलती है। एक मफलर 200 से 2500 ऊन से तैयार होती है, जबकि शॉल 800 ग्राम से लेकर एक किलो ऊन से तैयार होती है। इसकी बुनावट इतनी बारीक होती है कि यह त्वचा को किसी तरह की जलन नहीं पहुंचाती और लंबे समय तक टिकाऊ र...