अलीगढ़, नवम्बर 27 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। किसी की बुझी हुई आंखों में रोशनी लौट आना कैसा होता है? शायद वही जान सकता है जिसने अंधेरे को उम्रभर महसूस किया हो। अस्पतालों की प्रतीक्षा सूची में बैठे सैकड़ों लोग हर दिन इसी उम्मीद में जीते हैं कि कहीं कोई 'दधीचि' सामने आ जाए, जिसकी एक छोटी-सी हामी उनकी जिंदगी को नया सवेरा दे दे। लोग संकल्प तो बहुत लेते हैं, मगर पूरा करने में कदम ठिठक जाते हैं। इसी ठिठकन के बीच किसी की रोशनी, किसी का भविष्य और कई सपनों की उड़ान थम जाती है। अंगदान और नेत्रदान को लेकर तस्वीर उत्साहजनक उतनी नहीं, जितनी हर वर्ष किए जाने वाले संकल्पों से लगती है। आंकड़े बताते हैं कि एक साल में करीब 300 लोग नेत्रदान का संकल्प लेते हैं, लेकिन वास्तविकता यह है कि अस्पतालों को सिर्फ 40 कॉर्निया ही प्राप्त हो पाते हैं। संकल्प और उपलब्धत...