नई दिल्ली, जनवरी 22 -- सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद नेकचलनी (प्रोबेशन) पर रिहाई, विभागीय कार्यवाही में सजा कम करने का आधार नहीं है। शीर्ष अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका का निपटारा करते हुए यह फैसला दिया। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और एन.वी. अंजारिया की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि नेकचलनी पर रिहाई से सजा का दाग खत्म नहीं होता है। इसके साथ ही पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने एक कर्मचारी को विभागीय जांच में दी गई सजा सिर्फ इसलिए कम कर दी थी क्योंकि उसे आपराधिक कार्यवाही में नेकचलनी पर रिहा कर दिया गया था। पीठ ने पिछले सप्ताह पारित फैसले में कहा कि हाईकोर्ट ने ‌यह कहकर गलती की है कि यहां कर्मचारी के लिए सजा अयोग्यता नहीं होगी औ...