मुजफ्फरपुर, अक्टूबर 10 -- -उम्मीदवारी अभी गर्दिश में हार-जीत की दावेदारी भारी, काश! ये बेचैनी-बेकरारी साल दर साल होती मुजफ्फरपुर : चुनावी चर्चा गली-मोहल्ले में कुछ ऐसी छिड़ी है जीत-हार का समीकरण जैसे पल में बन बिगड़ रहे हों। जीत-हार का जैसे सब ठेका लेकर बैठे हैं। उधर, गठबंधनों में सीटों की गांठ ऐसी उलझी है कि नौबत सिर फुटौव्वौल वाली है। कई नेताओं की न पारी है न बारी, उम्मीदवारी अभी गर्दिश में है, मगर समर्थकों में टिकट मिलने से लेकर हार-जीत की दावेदारी भारी है। यह चुनाव मानो इन सबके लिए निर्णायक है। कहते हैं हमारे लिए ना सही मगर अगली कतार के स्वयंभू नेताओं के लिए अंतिम जरूर साबित हो सकता है। यही बेचैनी-बेकरारी चुनावी माहौल को और खुशरंग बना बैठी है। जिससे पिछले कई चुनावों से माहौल अलग दिखता है। नुक्कड़ पर चुनावी चर्चा में बहस-मुबाहिसे में र...
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