पूर्णिया, अक्टूबर 11 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता। पूर्णिया शहर का माहौल अब पूरी तरह चुनावी रंग में रंग चुका है। सुबह-सुबह जब पॉलिटेक्निक चौक की गलियों से गुज़रिए, तो चाय की भाप में घुली राजनीति की महक साफ़ महसूस होती है। मॉर्निंग वॉक का वक्त अब गपशप का वक्त बन गया है। कल तक चार चक्कर लगाने वाले बुजुर्ग अब दो चक्कर में ही लौट आते हैं। सीधे चाय की दुकान पर, जहां चर्चा का असली मैदान सजा रहता है। कप में चाय है, पर ज़ुबान पर सिर्फ चुनाव। अभी प्रत्याशी तय भी नहीं हुए हैं, मगर तर्क-वितर्क ऐसे चल रहे हैं मानो आज ही मतदान हो। एक बुजुर्ग मुस्कुराते हुए कहते हैं-जीत मामू जीत, हम्मे तोहरे दिस-तो दूसरा तुरंत टोक देता है, अरे अभी कैंडिडेट फाइनल कहाँ हुआ है, पहले नाम तो देख लीजिए! और फिर शुरू हो जाती है वही पुरानी, मगर ताज़ा लगने वाली बहस-कौन जीत...
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