भभुआ, अक्टूबर 15 -- (नुक्कड़ पर चुनाव) रामगढ़। सियासी मिजाज भांपने को मुराहू की मंडली गांव के प्रचार से सीधे बच्चन चौक पर पंहुची। चाय की पहली चुस्की के साथ ही डिस्को बाबू चालू हो गए। का हो मुराहू, माहुर जइसन मुंह काहे बनाए हो। मुराहू बोले- तो का मुस्की काटें। बड़े आए हो दिल्लगी करने। खर्चा के लफड़ा में दिमाग सुस्त हो गया है और तू आ गए दिमाग चाटने। तभी युवा टिक्कू ने मंडली में एंट्री मारी। पानी चाय के ऑफर के साथ मंडली के रंग बहादुर उर्फ रंगी से पूछ लिया। क्षेत्र में केकर हवा है। रंगी धीरे से बोले, का बताएं भैया। लगता है अबकी बेड़ा पार हो जाएगा। हम्मर नेता के त मीठ बोलते बोलते जीभ लरुआ जा रही है। निहुर के गोड़ धरते-धरते कमर धनुष बन गई है। दो महीना से परचारे में बिजी हैं। फिलहाल तो नमनेशन खातिर खरहा दौड़ में शामिल हैं। कर्जा का पूछो मत। जीते नहीं त...
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