आगरा, जनवरी 10 -- प्रार्थना वह पत्र है जो बिना किसी पोस्टमैन के हृदय से निकलकर क्षण भर में परमात्मा तक पहुंच जाता है। संसार की हर वस्तु को पहुंचाने के लिए साधन चाहिए, लेकिन सच्ची प्रार्थना को किसी सहारे की आवश्यकता नहीं होती। यदि मनुष्य श्रीमद्भागवत का जीवन में अनुसरण करे, तो सारे कष्ट स्वतः दूर हो जाएंगे और जीवन सुखमय बन जाएगा। यह उद्गार पंचकुइयां स्थित माथुर वैश्य भवन में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में व्यासपीठ से हरिदास अंकित कृष्ण महाराज ने व्यक्त किए। कथा में वामन अवतार, ध्रुव चरित्र और प्रह्लाद चरित्र के प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया गया। भगवान विष्णु के वामन अवतार की दिव्य झांकी में बाल ब्राह्मण स्वरूप में भगवान विष्णु के दर्शन से श्रद्धालु मोहित हो गए। राधे-राधे, गोविंद राधे के जयकारों से परिसर गुंजायमान हो उठा। अध्यक्ष मुकेश गुप्त...