जमशेदपुर, फरवरी 17 -- जनवादी लेखक संघ की सिंहभूम इकाई ने निराला जयंती-सह-जलेस का स्थापना दिवस रविवार को भोजपुरी भवन गोलमुरी में मनाया। कार्यक्रम को चार सत्र में विभाजित किया गया था। पहले सत्र में निराला जयंती मनाई गई जिसमें विमर्श का विषय कविता की प्रगतिशील धारा और निराला था। इस दौरान डॉ. अली इमाम खान ने कहा कि निराला ने साहित्य की जो पारंपरिक धारा थी, उससे खुद को अलग किया और कविताओं को उस समाज से जोड़ा, जो बहिष्कृत थे। जयनंदन ने कहा कि निराला कई तरह से, कई-कई रूपों में जनमानस में व्याप्त हैं। जिस कविता में आम आदमी की पीड़ा नहीं, प्रगतिशीलता नहीं, वह कविता ही नहीं है। शैलेन्द्र अस्थाना के अनुसार, हमारी दृष्टि हमेशा एक बेहतर भविष्य की तरफ देखती है, वह हमेशा से जीवन व समाजवाद की पक्षधर रही है। बकौल डॉ. अहमद बद्र निराला की विचारधारा, उनकी कव...