प्रयागराज, नवम्बर 27 -- प्रयागराज, विधि संवाददाता। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि किसी बच्चे के पितृत्व के निर्धारण के लिए डीएनए परीक्षण 'नियमित तरीके से नहीं किया जा सकता'। कोर्ट ने कहा कि डीएनए परीक्षण का आदेश केवल विशिष्ट परिस्थितियों में ही किया जा सकता है, जहां प्रासंगिक अवधि के दौरान पक्षों के बीच शारीरिक संबंध की कोई संभावना साबित नहीं होती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसा इसलिए निर्देशित नहीं किया जा सकता क्योंकि कोई पक्ष कानूनी कार्यवाही के दौरान माता-पिता के संबंध में विवाद करता है। यह आदेश न्यायमूर्ति चवन प्रकाश ने दिया है। इसी के साथ कोर्ट ने घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम (डीवी एक्ट) के मामले में पति की याचिका खारिज कर दी। याचिका के अनुसार वाराणसी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने डीएनए परीक्षण के लिए किसी भी आदेश स...