लखनऊ, अक्टूबर 31 -- बिजली कंपनियों के निजीकरण के साथ ही विद्युत कर्मचारियों ने विद्युत संशोधन बिल का भी विरोध करने का ऐलान किया है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने कहा कि केंद्र सरकार बिजली कंपनियों को वित्तीय सहायता के नाम पर उनके निजीकरण की कोशिश कर रही है। बिजली अभियंता और कर्मचारी इसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं करेंगे। पूरे देश के बिजली कर्मचारी और अभियंता इस मामले में एकजुट हैं। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे और सेक्रेटरी जनरल पी. रत्नाकर राव ने कहा कि बिजली संविधान की आठवीं अनुसूची में है। बिजली के मामले में केंद्र और राज्य सरकार के बराबर के अधिकार हैं। ऐसे में छह राज्यों के ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स की मीटिंग में सारे देश पर विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण का फैसला कैसे थोपा जा सकता है? 10 अक्तूबर ...
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