नई दिल्ली, अप्रैल 19 -- नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। 12 साल के एक लड़के से कुकर्म के दोषी व्यक्ति को अदालत ने ताउम्र (अपनी अंतिम सांस) तक जेल की सलाखों के पीछे रहने की सजा सुनाई है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि इस अपराध ने मानवीय गरिमा के मूल्यों का उल्लंघन किया है। तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया की अदालत ने अपने फैसले में कहा कि समाज में पनप रहे इस तरह के अपराध को जड़ से समाप्त करने के लिए अपराधी को समाज से हमेशा के लिए निकाल देना चाहिए, तभी इसमें सुधार हो सकता है। अदालत ने फरवरी 2023 में हुई इस घटना के लिए 47 वर्षीय व्यक्ति को दोषी ठहराया है। अदालत ने इस मामले में आरोपी की तरफ से सजा में नरमी की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि यह अपराधी समाज के लिए खतरा है। इसको सिर्फ इस आधार पर राहत नहीं दी जा सकती कि इसका परिवार...
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