गिरडीह, नवम्बर 17 -- बगोदर, प्रतिनिधि। ठंड का मौसम चल रहा है और शाम होने को थी। इससे ठिठुरन बढ़ गई थी। चिड़िया चहचहाती हुई अपने आशियाने की ओर जा रही थी। नदी का पानी मंद- मंद बह रहा था। सभी की आंखें नम थी। परिजनों के चित्कार से माहौल पहले से ही गमगीन था। इस बीच मृत प्रवासी मजदूर के मासूम बेटा के कांपते हाथों में चिराग था और वह अपने पिता को मुखाग्नि दे रहा था। यह पल हर किसी को भी भावुक करने वाला था। बगल में खड़े पूर्व विधायक विनोद कुमार सिंह भी दुखी थे। प्रवासी मजदूरों की पीड़ा, उनकी आकस्मिक मौतों के बाद पीड़ित परिजनों की स्थिति ये सभी बातें उनके दिमाग में चल रहा था। यह वाकया रविवार को बगोदर के पोखरिया श्मशान घाट के पास देखने को मिला। दरअसल इसी गांव के प्रवासी मजदूर खेमलाल महतो दक्षिण अफ्रीका में रहते थे और तबीयत खराब होने के बाद जब घर पहुं...
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