नई दिल्ली, फरवरी 3 -- सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि बच्चों द्वारा नशे में गाड़ी चलाने से होने वाले हादसों के लिए उनके माता-पिता को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। नाबालिग द्वारा तेज रफ्तार वाहन चलाए जाने से होने वाले हादसों पर चिंता जताते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि नशे में तेज रफ्तार वाहन चलाने से 'जश्न' नहीं होता है। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां की पीठ ने मई 2024 में पुणे में नाबालिग द्वारा लापरवाही से तेज रफ्तार लग्जरी (पोर्शे) कार चलाने से हुए हादसे में खून के नमूने बदलने और साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने के तीन आरोपियों को जमानत देते हुए मौखिक टिप्पणी की। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई थी। जस्टिस नागरत्ना ने इस तरह के हादसों पर दुख जताया और कहा कि ऐसे माता-पिता कितने गैर-जिम्मेदार होते हैं जो अपने नाबालिग बच्चों को तेज रफ्ता...