पूर्णिया, जून 13 -- पूर्णिया, हिन्दुस्तान संवाददाता।भरत नाट्य कला केन्द्र और रंगमिथ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित बीस दिवसीय प्रस्तुतिपरक नाट्य प्रशिक्षण कार्यशाला में गत दिनों भिखारी ठाकुर सम्मान प्राप्त वरिष्ठ रंगकर्मी उमेश आदित्य और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार व भिखारी ठाकुर सम्मान प्राप्त राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक मिथिलेश राय ने बच्चों को नाटक के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया। पहले सत्र में उमेश आदित्य ने प्राचीन भारतीय संस्कृत नाटक के आरंभ की बात की। उन्होंने कहा कि भारतीय नाटकों का शास्त्र भरत मुनि रचित नाट्य शास्त्र है। इसे पंचम वेद की संज्ञा दी गई है। आदित्य ने सभी कलाकारों को प्राचीन संस्कृत नाटक के बारे में और देवताओं के लिए किए जाने वाले प्रथम नाटक की भी जानकारी दी। उन्होंने कलाकारों को अपनी तैयारी के बारे में भी अवगत ...
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