नई दिल्ली, फरवरी 2 -- पाकिस्तान सिंधु जल संधि पर कोर्ट-कोर्ट खेल रहा है। दूसरी ओर भारत का रूख पहले से ही स्पष्ट है। अब भारत ने सिंधु जल संधि से जुड़े अंतरराष्ट्रीय न्यायालय के आदेश को स्पष्ट रूप से मानने से इनकार कर दिया है। भारत का कहना है कि यह कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन अवैध रूप से गठित है और इसके आदेशों को भारत मान्यता नहीं देता। दरअसल, अंतरराष्ट्रीय अदालत ने भारत को निर्देश दिया था कि वह अपने जलविद्युत संयंत्रों के परिचालन रिकॉर्ड (विशेष रूप से बगलिहार और किशनगंगा परियोजनाओं के पोंडेज लॉगबुक) प्रस्तुत करे, ताकि आगे की सुनवाई में इनका उपयोग किया जा सके। अदालत ने 9 फरवरी 2026 तक इन दस्तावेजों को सौंपने या अनुपालन न करने पर औपचारिक स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। दरअसल, हेग स्थित मध्यस्थता न्यायालय (Court of Arbitration) सिंधु जल संधि के ढां...
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