लखनऊ, मई 18 -- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने नियामक आयोग के अभिमत देने पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। संघर्ष समिति ने कहा है कि वर्ष 2020 में संघर्ष समिति और सरकार के बीच हुए समझौते पर मौजूदा नियामक आयोग अध्यक्ष के दस्तखत हैं। लिहाजा वह अब इस मामले में बतौर नियामक आयोग अध्यक्ष कैसे अपनी राय दे सकते हैं? संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे ने कहा कि संघर्ष समिति के साथ 6 अक्टूबर 2020 को वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व तत्कालीन ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा की मौजूदगी में लिखित समझौता हुआ था। तब मौजूदा नियामक आयोग अध्यक्ष पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष थे। समझौता पत्र में लिखा है, 'पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का प्रस्ताव वापस लिया जाता है। इसके अतिरिक्त किसी अन्य व्यवस्था का प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। उत्तर प्रदेश में विद्युत वितर...
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