एटा, जनवरी 7 -- आवारा पशुओं और कुत्तों से कोई भी क्षेत्र अछूता नहीं है। कहीं-कहीं तो ऐसा आतंक है कि लोग डर की वजह से सड़कों पर निकलने से डरते हैं। गलियों में भी कुत्ते खूंखार हो गए हैं कि जो बच्चों को निशाना बना देते हैं। इसके बाद भी जिले में ऐसा कोई स्थान नहीं बनाया जहां उन्हें रखा जा सके। न ही कुत्तों की नसबंदी के लिए कोई अभियान चलाया गया। इससे दिनों दिन इनकी संख्या बढ़ती जा रही है। रोजाना जिले में 500 से अधिक लोग वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंच जाते है। शहर के मुख्य मार्ग, राजमार्ग, बाजार, रेलवे अंडरपास के अलावा स्कूलों के आसपास आवरा कुत्तों के झुंड बैठे रहते हैं। अंधेरे में यह सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण बन रहे हैं। राहगीर गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं और कई मामलों में तो लोगों को अपनी जान भी गंवानी पड़ी है। आवारा पशुओं के जमावड़े से सड...
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