नवादा, जनवरी 8 -- नवादा, हिन्दुस्तान संवाददाता। नवादा जिले में जल संकट अब केवल इंसानों की खेती-बाड़ी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने पशुपालन के बुनियादी ढांचे को हिलाकर रख दिया है। कभी छोटी-छोटी कलकल बहती नदियों और जलधाराओं के लिए मशहूर यह जिला आज अपनी पहचान खो रहा है। जिले की खुरी, सकरी, धनार्जय, तिलैया व ढाढर जैसी नदियों समेत इनकी उपनदियां पंचाने, नाटा आदि का जलस्तर न केवल नीचे गया है, बल्कि कई हिस्सों में ये नदियां पूरी तरह से मैदान में तब्दील हो गई हैं। इसका सीधा असर पशुपालकों पर पड़ा है, जिनके सामने अब अपने मवेशियों को जिंदा रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। नवादा की सूखती नदियां पर्यावरण की क्षति समेत ग्रामीण संस्कृति और जीविका के अंत का संकेत है। जिन नदियों में कभी पशु अठखेलियां करते थे, वहां आज धूल उड़ रही है। यदि सरकार और समाज ने मिलकर जल ...