नई दिल्ली, दिसम्बर 31 -- किसी मौलवी ने नए साल मनाने से मुस्लिम समुदाय को मना किया है। मुस्लिम हिजरी संवत मानते हैं, यह कोई गलत बात नहीं है। बस यही कि न मनाने का फतवा अनावश्यक और अतिरेक हो गया है। हिंदू नववर्ष चैत्र से मनाते हैं। पोंगल व लोहड़ी भी नए साल का ही जश्न है। इसके पीछे अनेक कारण होते हैं, परंपराएं होती हैं। चैत्र में मौसम खुशनुमा रहता है। 'चितै चैत की चांदनी चाह भरी, चरचा चालवे की चलाइयै न।' इस समय नई फसल का अनाज किसान के घर आता है। खेती के काम के बीच अंतराल का यह समय होता है। राम और दुर्गा से जुड़कर इसका धार्मिक पक्ष भी आता है। फिर भी, ईसाई संवत का चलन ही प्रभावी है। आखिर क्यों? लगभग 15वीं शताब्दी के बाद से यूरोप के विश्व गुरु बनने की शुरुआत दिखने लगती है। वे शैक्षणिक, राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विकास में शक्तिशाल...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.