बागपत, जनवरी 12 -- बड़ौत। नगर स्थित अजीतनाथ सभागार में धर्म सभा आयोजित की गई। जिसमें आचार्य विमर्श सागर महाराज ने प्रवचन करते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन के दो मार्ग है। एक योग का और दूसरा भोग का। योग का मार्ग संयम का मार्ग है। जब मनुष्य त्याग, धर्म और संयम से जुड़ जाता है, तब उसकी यात्रा जगदीश्वर की यात्रा हो जाती है। नर से नारायण बनने को यात्रा का शुभारम्भ संयम से होता है। संयम में पंचेन्द्रिय के विषयों का त्याग कराया जाता है। सभा का संचालन श्रेयांस जैन ने किया। इस मौके पर सुरेश जैन, महेंद्र जैन, मुकेश जैन, प्रदीप जैन, वरदान जैन, अमित जैन, त्रिशला जैन, इंद्राणी जैन आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।
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