सिमडेगा, जनवरी 19 -- रेंगारिह, प्रतिनिधि। आजादी के दशकों बाद भी कोनपाला पंचायत के सुदूरवर्ती गांव गोमियाबेड़ा विकास की बुनियादी रेखा से काफी दूर खड़ा है। गांव में न सड़क है, न बिजली और न ही स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था। हालात ऐसे हैं कि गर्भवती महिलाओं और गंभीर मरीजों को आज भी खटिया के सहारे अस्पताल पहुंचाया जाता है। जंगल क्षेत्र में बसे इस गांव के ग्रामीण हर समय जंगली हाथियों के भय में जीवन जीने को मजबूर हैं। गांव के लोग नदी के पानी से प्यास बुझाते हैं। इससे बीमारी का खतरा बना रहता है। वहीं अंधेरे और दुर्गम रास्तों के कारण बच्चों की पढ़ाई भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। ऐसे हालात में गांव के ग्रामीणों की पीड़ा जानने पूर्व उप मुखिया सह समाजसेवी दीपक लकड़ा तीन किमी पैदल चलकर गोमियाबेड़ा पहुंचे। गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने मांदर-ढोल, देसी ...
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