सीवान, जनवरी 9 -- सीवान, हिन्दुस्तान संवाददाता। जिले में नदियों व जलाशयों के सूखने के साथ ही इनके घटते जलस्तर ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। एक समय जिन नदियों व तालाबों के सहारे आसपास के समुदायों की जीविका-आजीविका चलती थी, आज वही जलस्रोत सूखे या बेहद सिकुड़े हुए नजर आ रहे हैं। ऐसे में इसका सीधा प्रभाव मछुआरों, नाविकों, धोबियों व उनसे जुड़े छोटे-छोटे व्यवसायों पर पड़ा है। हसनपुरा प्रखंड के मछुआरे रामनाथ सहनी ने बताया कि पहले पास की नदी से प्रतिदिन 5 से 7 किलो मछली निकाल लेते थे। इससे पूरे परिवार का खर्च चल जाता था। मगर अब दाहा नदी में पानी ही नहीं है तो मछली कहां से मिलेगी। उन्होंने बताया कि पिछले कई महीनों से जाल पानी में डालने का मौका ही नहीं मिला। मजबूरी में दिहाड़ी मजदूरी करने जाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं ह...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.