समस्तीपुर, जनवरी 7 -- समस्तीपुर। जिंदा रहने के लिए पानी की जितनी जरूरत इंसान को है, इतनी ही पशुओं को भी है। इंसान खुद तो हाइटेक बनाने की कोशिश में जुटा है, लेकिन पशुओं के लिए पीने का साफ पानी भी नहीं है। जिले से होकर गुजरने वाले नदीयों पर संकट गहराया हुआ है। ज्यादातर में जल नहीं है। जहां है भी, वह पशुओं के पीने लायक नहीं बचा है। लिहाजा संक्रमित जल पीने से पशु रोगों की चपेट में आ रहे हैं। पशुओं को नदी, झील, तालाबों नहलाना व पानी पिलाना अब गुजरे जमाने की बात नजर आने लगी है। गांवों में बसने वाले इंसान व जानवरों की जिंदगी का दारोमदार तो नदी ही थे। इनसे ही दिनचर्या शुरू व इन्हीं के सहारे खत्म होती थी। गर्मियों के दिनों में भैंसों के लिए नदियां जीवनदायिनी का काम करते थे। लेकिन ज्यों ज्यों हाईटेक युग में प्रवेश किया, त्यों त्यों पशुओं को पानी पि...