खगडि़या, जनवरी 7 -- खगड़िया, हिन्दुस्तान संवाददाता नदियों पर गहराते संकट का प्रभाव केवल जलस्रोतों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका सीधा असर पर्यावरण, जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। इसके सूखने और अविरल प्रवाह के बाधित होने से जलीय जीवों पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। कई प्रजातियों की मछलियां अब दिखाई नहीं देतीं, जिससे स्थानीय मछुआरों की आजीविका भी प्रभावित हुई है। जानकार नरेश सहनी बताते हैं कि कवई, मांगुर, झिंगा, हिलसा, मूल पेंंगास, रीठा, बधार जल स्तर घटने और प्रदूषण बढ़ने के कारण जलीय पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित हो गया है। इस संकट का जैव विविधता पर नकारात्मक असर पड़ा है। नदी पर निर्भर पक्षी, वनस्पति और अन्य जीव-जंतु या तो विलुप्त हो रहे हैं या क्षेत्र छोड़ने को मजबूर हैं। इससे प्राकृतिक खाद्य श्रृंखला भी टूट रही ह...
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