बगहा, जनवरी 10 -- पश्चिम चंपारण जिले की छोटी नदियां आज अपना अस्तित्व खोती जा रही हैं। कभी गांवों की जीवनरेखा मानी जाने वाली ये नदियां अब गाद, सिल्ट, जलकुंभी, शैवाल और अतिक्रमण की चपेट में आकर दम तोड़ती नजर आ रही हैं। बांसी नदी जहां जलकुंभी और शैवाल के कारण लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंच गई है, वहीं बैरिया से निकलने वाली कोहड़ा नदी और भवानीपुर से निकलने वाली चंद्रावत नदी पर अतिक्रमण का ऐसा साया पड़ा है कि उनकी प्राकृतिक धाराएं ही गायब होती जा रही हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, नदियों में गाद और सिल्ट का अत्यधिक जमाव उनकी मौत का सबसे बड़ा कारण बनता जा रहा है। बरसात के समय पहाड़ों और खेतों से बहकर आने वाली मिट्टी नदी की तलहटी में जम जाती है। समय पर सफाई नहीं होने से नदी की गहराई लगातार कम होती जाती है। परिणामस्वरूप, नदी का जलधारण क्षमता घटती है और थो...
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