पूर्णिया, जनवरी 9 -- पूर्णिया-बायसी-बनमनखी, हिटी।नदियों के जलस्तर के घटने के साथ नदियों के किनारे रहने वाले लोगों की अर्थव्यवस्था भी सिकुड़ने लगी है। कई नदियां आसपास के समुदायों की आजीविका का स्रोत भी होती थीं। मछुआरे उनसे मछली निकालते थे। जाल बनाने वालों को रोजगार मिलता था। यही नहीं धोबी कपड़ा धोते थे। उन्हें अब मोटर चलाकर पानी की व्यवस्था करनी होती है। नौका चलाना बंद होने से नाविकों का रोजगार छीन गया। नदियों में लगातार घट रहे जलस्तर के कारण इन नदियों में पाए जाने वाली प्राकृतिक संपदाएं भी अब विलुप्त होती जा रही है। इन नदियों में पाई जाने वाली मछलियों की कई विशेष प्रजातियां टेंगरा, रेवा, बामी, गैंचा, भुन्ना, भौरा,कबई जैसी कई मछलियों की प्रजातियां विलुप्तता के कगार पर है। इन नदियों में पाए जाने वाले प्राकृतिक संपदाओं में कमल फूल, कोका फुल...
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