कानपुर, दिसम्बर 9 -- कानपुर। प्रमुख संवाददाता नदियों के आने-जाने का स्वरूप समान रखने की जिम्मेदारी जिला समिति को सौंपी जाए। गंगा या अन्य नदियां जिस स्वरूप में किसी शहर में प्रवेश करें तो उसकी निकासी भी उसी स्वरूप या और बेहतर स्वरूप में हो। इसमें जलस्तर, जल में प्रदूषण जैसे सभी मानकों को परखा जाए तभी नदियों को अविरल, निर्मल व संरक्षित किया जा सकता है। इसके लिए जिलेवार नदी प्रबंधन परियोजना भी तैयार की जाए। यह मंथन 10वां इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट में हुआ। जिसमें गंगा मिशन से जुड़े अधिकारी, शिक्षाविद, वैज्ञानिक व पर्यावरणविद ने अपने-अपने तर्क रखते हुए मंथन किया। आईआईटी कानपुर के सी-गंगा (गंगा बेसिन प्रबंधन एवं अध्ययन केंद्र) और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की ओर से आईआईटी दिल्ली के ऑडीटोरियम में तीन दिवसीय 10वां इंडिया वाटर इम्पैक्ट समिट मंगलवा...
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