मुजफ्फरपुर, जनवरी 9 -- मुजफ्फरपुर, वरीय संवाददाता। उत्तर बिहार की सदानीरा प्रमुख नदियों में हर साल जहां पानी की कमी होती जा रही है, वहीं उनकी कई सहायक नदियों का नामोनिशान मिट गया है। जो बच गए हैं, वह शहरी व ग्रामीण इलाकों में सौंदर्यीकरण के नाम पर हो रहे निर्माण कार्य के कारण गाद से भरते जा रहे हैं। पक्का निर्माण होने से उनके जलस्रोत भी बंद होते जा रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर इन नदियों और जलस्रोतों से आजीविका कमाने वालों पर पड़ा है। खासकर मछुआरा समाज और इनके किनारे मौसमी सब्जियों की खेती करनेवाले अधिक प्रभावित हुए हैं। विशेषज्ञ भी कहते हैं कि प्रदूषण और गाद के चलते जैसे-जैसे पारिस्थितिकी तंत्र ध्वस्त हो रहा है, पानी को पढ़ने, मछली के व्यवहार को समझने, मौसमी पैटर्न जानने का पारंपरिक ज्ञान बेकार हो रहा है। जो पहले नदियों के बहाव के साथ सालो...
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