प्रतापगढ़ - कुंडा, दिसम्बर 6 -- समुद्र मंथन में भगवान ने तीन अवतार लिए, कच्छप अवतार से मंथन कराया, मोहिनी अवतार से देवताओं को अमृत का रसपान कराया, वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांग कर सबसे बड़ा दानी बनाया। यह बात शुकुलपुर दिलेरगंज में चल रही श्रीमद भागवत कथा में आचार्य डॉ. श्याम सुन्दर पाराशर ने कही। उन्होंने कहा जिस तरह सूर्य किरणों के माध्यम से संसार का सभी वस्तुओं से रस लेता है, बाद में वाष्प बनकर संसार को वर्षा के रुप में वापस कर देता है। उसी तरह से राजा को भी जनता से लिए कर को विकास के रूप में जनता को वापस करना चाहिए। जो ऐसा नहीं करते वह जनता के पाप के भागीदार होते हैं। संसार में गो माता और धरती माता का बहुत शोषण हो रहा है। गो माता के चार थनो में दो ही थनो का दूध मानव को लेना चाहिए, दो थन का दूध उसके बच्चों को देना चाहिए। लेक...