कानपुर, फरवरी 24 -- बिठूर। मातृछाया गुरुकुलम में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के दूसरे दिन वातावरण भक्तिरस से सराबोर हो उठा। कथा व्यास आचार्य रविशंकर (किंकर जी) महाराज ने ध्रुव चरित्र, सती चरित्र एवं प्रह्लाद चरित्र का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायक वर्णन किया। उन्होंने बताया कि ध्रुव की अटूट भक्ति, दृढ़ निश्चय और तपस्या हमें जीवन में लक्ष्य के प्रति समर्पण और संघर्ष की प्रेरणा देती है। सती चरित्र के माध्यम से त्याग, आत्म सम्मान और नारी गरिमा का सशक्त संदेश दिया गया। वहीं प्रह्लाद चरित्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों और अत्याचारों के बीच भी ईश्वर के प्रति अडिग श्रद्धा और विश्वास अंततः विजय दिलाता है।

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