आगरा, दिसम्बर 28 -- समाधि पार्क मंदिर, सूर्य नगर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस पर भक्त और भगवान के अविच्छिन्न संबंध की छाया हर हृदय में दिखी। कथा व्यास श्री कीर्ति किशोरी ने ध्रुव और प्रह्लाद चरित्र का भावपूर्ण वर्णन किया। ध्रुव की तपस्या, संकल्प और लक्ष्य के प्रति अडिग विश्वास का उदाहरण सामने आया। सौतेली माता के कटु वचनों से आहत होकर ध्रुव ने कठोर तप किया और प्रभु नारायण प्रसन्न होकर ध्रुव तारे का पद प्रदान किया। प्रह्लाद की भक्ति निष्काम प्रेम का स्वरूप थी, पिता हिरण्यकशिपु के अत्याचार भी उसे प्रभु से विमुख नहीं कर सके। मधुर भजन और हरिनाम संकीर्तन से पंडाल भावविभोर रहा। मुख्य अतिथि प्रो. एसपी सिंह बघेल ने कहा कि कथा समाज को संस्कारित और सशक्त बनाने का माध्यम है।

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