मेरठ, दिसम्बर 26 -- आवास एवं विकास परिषद की योजना संख्या 7 के भूखंड संख्या 661/6 पर मूल आवंटी वीर सिंह के वारिसों द्वारा दावा किए जाने के बाद शुक्रवार को व्यापारियों ने भी प्रेस को जारी पत्र में अपना पक्ष रखा। इसमें व्यापारियों ने कहा कि मूल आवंटी ने व्यापारियों को धोखाधड़ी से आवासीय प्लॉट को व्यावसायिक बताकर बेचा था। आवंटी वीर सिंह द्वारा 1989 में 12 दुकानें बनाकर किराये पर दी गई थीं। व्यापारी दुकानों को किराये पर लेकर काबिज हो गए थे। इसके बाद 1994 से लेकर 2010 तक व्यापारियों ने अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्यावसायिक बैनामे कराकर वीर सिंह से खरीद ली थी। इसमें भी उन्हें धोखे में रखकर आवासीय भूखंड पर व्यवसायिक स्टांप शुल्क लेकर रजिस्ट्री कराई गई। इन दुकानों के पीछे भाग में कुछ भूमि रिक्त थी, जिसका मुख्तारनामा वीर सिंह द्वारा विनोद अरोड़ा को 20...