गंगापार, नवम्बर 11 -- घूरपुर, हिन्दुस्तान संवाद पिछले वर्ष सैनिक कीट की मार खाए किसान अभी उबर नहीं पाए थे कि इस वर्ष फिर से धान की बालियों पर सैनिक कीटों ने प्रहार शुरू कर दिया। इससे किसानों की रात की नींद और दिन का चैन गायब हो गया है। किसान धान की बालियों में लगे सैनिक कीटों से बचाव के लिए तमाम तरह की कीट नाशक दवाओं का छिड़काव कर धान की पकी फसल को बचाने के प्रयास में लगे हुए हैं। बताते चलें कि विगत वर्ष जब किसानों की टाटा मंसूरी धान की फसल खेतों जैसे ही पकने को तैयार हुई उसी बीच बालियों में सैनिक कीट का प्रहार हो गया और बालियों में लगे कीट धान की बालियों को कुतर कर नीचे गिरा दिए थे। इसकी वजह से पिछले वर्ष किसानों की उपज में 75 फीसदी की कमी हो गई थी। इसी तरह इस वर्ष भी धान की अच्छी फसल को देखकर किसानों को अनुमान था कि इस वर्ष पिछले वर्ष ह...