लखनऊ, फरवरी 14 -- लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता। राजकीय आयुर्वेद कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. जेएन मिश्रा ने शरीर पर उभरने वाले निशान यानी केलॉइड का बिना चीरा इलाज करने वाली नई तकनीक का खुलासा किया है। धागे से इलाज मुमकिन हो गया है। हजरतगंज स्थित नवचेतना केंद्र में शनिवार को डॉ. जेएन मिश्र ने बताया कि आयुर्वेद पद्धति में ट्यूमर को अर्बुद कहा गया है। प्राचीन समय में कीमोथेरेपी या रेडियोथेरेपी जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। सुश्रुत संहिता में शल्य चिकित्सा की 100 से अधिक तकनीकें बताई गई हैं। नई तकनीक में प्रेशर इस्केमिक ग्रेडिएंट का प्रयोग होता है। इसमें उभरे निशान को धागे से बांधकर तीन दिन बाद धागे को कसते हैं। यह प्रक्रिया तब तक दोहराई जाती है जब तक दर्द न हो। कुछ समय बाद केलॉइड कटकर अलग हो जाता है। इस पद्धति का कई मामलों में सफल इस्तेमाल हो चुक...
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