कैलाश पाठक, जुलाई 1 -- हिंदू, बौद्ध, जैन और तिब्बत के बोनपा धर्म ग्रंथों में कैलास-मानसरोवर का मनोहारी वर्णन है। कैलास को बहुत श्रद्धा भाव के साथ धर्म का 'आत्मा पर्वत' भी कहा गया है। आइए, इस पावन महातीर्थ की तीन बार यात्रा कर चुके वरिष्ठ लेखक से जानते हैं कि इसकी महिमा कितनी अपरंपार है...कैलास-मानसरोवर यात्रा (30 जून से आरंभ ) स्कंद पुराण में कहा गया है- 'हिमालय की तरह कोई पर्वत नहीं है, जहां कैलास-मानसरोवर मौजूद है, जैसे सुबह का सूरज ओस की बूंदों को सोखता है, वैसे ही यहां मनुष्य के पाप सोख लिए जाते हैं।' वास्तव में पवित्र स्थानों की कोई शुरुआत नहीं होती है। वे मनुष्य को धड़कते हुए मिलते हैं और फिर उसकी विरासत का हिस्सा हो जाते हैं। कैलास-मानसरोवर ऐसा ही एक क्षेत्र है, जो एशियाई समाजों की स्मृति में सहस्राब्दियों से उपस्थित है। यह न सिर्फ...
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