नई दिल्ली, दिसम्बर 9 -- गौतम बुद्ध ऐसे हैं, जैसे हिमाच्छादित हिमालय। पर्वत तो और भी हैं, हिमाच्छादित पर्वत भी और हैं, पर हिमालय अतुलनीय है। उसकी कोई उपमा नहीं है। हिमालय बस हिमालय जैसा है। गौतम बुद्ध बस गौतम बुद्ध जैसे हैं। मनुष्य जाति के इतिहास में वैसा महिमापूर्ण नाम दूसरा नहीं। बुद्ध ने जितने हृदयों की वीणा को बजाया है, उतना किसी और ने नहीं। गौतम बुद्ध की वाणी अनूठी है। विशेषकर उनके लिए, जो सोच-विचार, चिंतन-मनन, विमर्श के आदी हैं। हृदय से भरे हुए लोग सुगमता से परमात्मा की तरफ चले जाते हैं। लेकिन हृदय से भरे हुए लोग कहां हैं? और हृदय से भरने का कोई उपाय भी तो नहीं है। बुद्ध ने उनको चेताया, जिनको चेताना सर्वाधिक कठिन है। विचार से भरे लोग, बुद्धिवादी, चिंतन-मननशील। प्रेम और भाव से भरे लोग परमात्मा की तरफ सरलता से झुक जाते हैं, उन्हें झुका...