नई दिल्ली, नवम्बर 24 -- अभिनेता धर्मेंद्र की इस संसार से विदाई हिंदी फिल्म संसार में एक युग के अवसान की तरह है। वह 1960 के दशक में उभरे एक ऐसे कलाकार-नायक थे, जो भारतीय समाज में अपनी अलहदा पहचान की वजह से किंवदंती बन गए थे। वह भारतीयों की बोलचाल में एक मुहावरे की तरह शुमार हो गए थे, 'अरे, क्या धर्मेंदर बन रहे हो?' धर्मेंदर बनने का मतलब बलवान या साहसी होना हो गया था। एक दौर वह भी था, जब लड़कों में धर्मेंद्र और लड़कियों में हेमा मालिनी का अक्स ढूंढ़ा जाता था। न जाने कितने युवाओं ने उनका अनुकरण किया। हालांकि, स्वयं वह दिलीप कुमार का अनुकरण करते हुए फिल्मों में आए थे। हम जिसे बॉलीवुड कहते हैं, उसमें उनका डंका पचास साल पहले भी बजता था। विशेष रूप से राज कपूर के बाद उन्हें सिनेमा की दुनिया में एक ऐसी ताकत के रूप में देखा जाता था, जिन्हें कोई भी ...
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