लखीमपुरखीरी, फरवरी 6 -- ग्राम कपरहा के मजरा तेन्दुआ मंदिर पर आयोजित धनुष यज्ञ मेले के तीसरे दिवस कलाकारों द्वारा राम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण मंचन किया गया। मंचन के दौरान दर्शक भक्ति और श्रद्धा से भाव-विभोर हो उठे। प्रसंग के अनुसार कलाकारों ने दिखाया कि जब राजा दशरथ को पुत्र न होने की ग्लानि हुई तो वे नंगे पांव गुरु वशिष्ठ के पास पहुंचे और अनुनय-विनय करते हुए स्वयं को निरवंशी बताया। इस पर महर्षि वशिष्ठ ने उन्हें ऋषि शृंगी को बुलाकर पुत्रेष्टि यज्ञ कराने का परामर्श दिया। राजा दशरथ ने गुरु आज्ञा का पालन करते हुए पुत्रेष्टि यज्ञ कराया। यज्ञ के दौरान अग्निदेव प्रकट हुए और उन्होंने खीर का कटोरा राजा दशरथ को दिया, जिसे सभी रानियों में समान रूप से बांटने को कहा गया। खीर ग्रहण करने के पश्चात रानियां गर्भवती हुईं और कालांतर में भगवान श्रीराम, लक्ष्...