गंगापार, अक्टूबर 28 -- बारा, हिन्दुस्तान संवाद। सेहुड़ा में सोमवार को धनुष यज्ञ की रामलीला में रावण,बाणासुर सहित अन्य राजाओं द्वारा धनुष भंग न कर पाने पर राजा जनक अधीर हो उठे, और उन्होंने यहां तक कह दिया कि मुझे लगता है कि पृथ्वी वीर-विहीन हो गई है। यदि समय रहते मुझे जानकारी हो जाती तो हम ऐसा कठिन प्रण ही न करते। जनक जी की बातें सुनकर भइया लक्ष्मण खुद को न रोक सके और कहा कि प्रभु श्रीराम के होते जनक जी का ऐसा कहना तीर की भांति चुभ रहे हैं। लगता है कि यह वास्तविकता से अपरिचित हैं। इस दौरान पेटल राजा, लस्टकिया, मेहरा राजाओं की प्रस्तुति भी बेहद शानदार रही। रावण, बाणासुर संवाद भी दर्शकों को बहुत पसंद आया। राजा जनक की व्याकुलता को देखते हुए मुनि विश्वामित्र ने श्रीराम को धनुष का खंडन करने का आदेश दिया। उन्हें प्रणाम करते हुए श्रीराम यज्ञशाला ...
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