सुल्तानपुर, दिसम्बर 11 -- गोसाईगंज, संवाददाता। द्वारिकागंज के समीप दुर्गा मंदिर पर चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास गौरंग बैरागी महाराज ने गुरु भक्ति और शिष्य धर्म पर आधारित प्रसंगों का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भाव-विह्वल कर दिया। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने अपने गुरु के सम्मान की खातिर ऋषि दुर्वासा के श्राप को भी स्वीकार कर लिया। गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए कृष्ण ने जिस भोजन को दुर्वासा ऋषि पूरा न खा सके थे, उसी के कारण होने वाले श्राप को भी सहर्ष मान लिया। कथा व्यास ने इसे गुरु के प्रति समर्पण का अद्भुत उदाहरण बताया। इसके साथ ही श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया गया। उन्होंने बताया कि विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी ने बचपन से ही श्रीकृष्ण को अपना पति मान लिया था, परंतु भाई रुक्मी ने ...